जीवन का प्रथम और अंतिम उद्धारक स्वयं हम ही हैं।

तनाव, दुःख, चिंता – ये तब तक ही भारी होते हैं जब तक हम उन्हें छोड़ना नहीं जानते।

जीवन, एक यात्रा है — मोह से मोक्ष तक

सच्ची मुक्ति जंगलों में नहीं, बल्कि आत्म-चिंतन में है।

अयोध्या परिक्रमा विशेष

तांडव तो बस शिव कर सकते हैं। सचमुच, शिव का नृत्य अनन्त प्रतीक है; दर्शन भी, कला भी, विज्ञान भी।

क्या कोई व्यक्ति परिपूर्ण (परफेक्ट) होता है?

Blogger द्वारा संचालित.